'विक्रम' को जगाने के लिए 'नासा' ने इसरो की मदद के लिए हाथ आगे बढाया है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि नासा ने अपने डीप स्पेस नेटवर्क के जरिए विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश की है। इस कोशिश में पॉजिटिविटी दिखाई दे रही है। नासा के एक ग्राउंड स्टेशन से विक्रम को रेडियो फ्रीक्वेंसी के माध्यम से संदेश भेजा गया था जिसकी प्रतिक्रिया तो मिली है लेकिन बहुत हल्की प्रतिक्रिया थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि विक्रम की इस प्रतिक्रिया से मिशन की उम्मीदें फिर जाग गयी हैं।
दरअसल, चंद्रमा के जिस ओर विक्रम ने हार्ड लैण्डिंग की है वहां 14 दिन ही सूर्य की रोशनी आती है
।ये 14 दिन 20-21 सितंबर को समाप्त हो रहे हैं। उसके बाद गहरे अंधकार और महाशीत के दौरान विक्रम की बैटरी और सोलर पैनल को सक्रिय नहीं किया जा सकता। इसलिए प्रयास किये जा रहे हैं कि किसी तरह विक्रम को 20 सितंबर से पहले जगाकर प्रज्ञान को उसके भीतर से बाहर निकाला जा सके और शोध कार्य को आगे बढ़ाया जा सके। इसरो के एक अन्य सूत्र ने बताया कि नासा कैलिफोर्निया, मेड्रिड और कैनबरा स्थित अपने ग्राउंड स्टेशनों से रेडियो फ्रीक्वेंसी बीम कर रहा है और उम्मीद है कि किसी न किसी स्टेशन से विक्रम का संपर्क हो ही जायेगा। इसरो को विक्रम से संपर्क की उम्मीद इसलिए भी बढ़ गयी है क्यों कि नासा के खगोल विज्ञानी स्कॉट टिली ने एक ट्वीट में कहा है कि विक्रम को भेजे गये संदेश की हल्की सी प्रतिक्रिया मिली है। टिली के इस ट्वीट से इसरो के वैज्ञानिकों में खुशी की लहर दौड़ गयी है।
ध्यान रहे, सात सितंबर को चंद्रमा के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैण्डिंग से ऐन पहले विक्रम राह भटक गया और कुछ दूर जाकर गिर पड़ा। मिशन चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने कुछ ही घण्टों बाद विक्रम की तस्वीरें इसरो को भेजीं तो उससे संपर्क उम्मीदें जाग गयीं । क्योंकि जो तस्वीरें आयी उन्हें देखकर वैज्ञानिकों ने बताया कि विक्रम पूरी तरह सुरक्षितहै लेकिन एक और झुक गया है। जिस कारण सम्पर्क कर पाना मुश्किल हो रहा है। इसरो के चीफ के.सिवन ने कहा था कि विक्रम से सम्पर्क करने की कोशिश आखिरी क्षण तक की जायेगी। पांच दिन बाद भी विक्रम से कोई सम्पर्क भले नहीं हो पाया है लेकिन वैज्ञानिकों ने अभी तक हार नहीं मानी है और वो हर हाल में विक्रम को जाग्रत कर प्रज्ञान को बाहर लाकर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी और हीलियम-3 की उपलब्धता को सुनिश्चित करना चाहते हैं।







